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Thursday, August 6, 2020

‘मैंने अपनी चिता बनाई, और उस पर सो गया’

मुंबई मैंने अपनी चिता बनाई, और उस पर सो गया, और मेरी आग से, वह जल उठी। अब मेरे सपने खत्म हो गए हैं। मैं राख बनकर उठा और जो कुछ बचा था, उसे उठाकर झरने में छोड़ आया, और उम्मीद किया कि मेरी राख के पास अबकी एक बेहतर सपना होगा।' यह आखिरी कविता है, टीवी जगत के जाने-माने अभिनेता समीर शर्मा की, जो मुंबई स्थित अपने घर पर मृत पाए गए हैं। समीर का शव बुधवार रात मालाड स्थित उनके घर में पंखे से लटकता हुआ मिला। हालांकि, पुलिस को कोई स्यूसाइड नोट नहीं मिला है, इसलिए ऐक्सिडेंटल डेथ का केस रजिस्टर किया गया है, लेकिन समीर के इंस्टाग्राम पोस्ट देखकर अंदाजा होता है कि वे काफी दर्द में थे। शोक में टीवी और फिल्म इंडस्ट्री मूल रूप से दिल्ली के रहने वाले समीर ने अपने लंबे करियर में क्योंकि सास भी कभी बहू थी, 'कहानी घर घर की', 'लेफ्ट राइट लेफ्ट', 'वो रहने वाली महलों की', 'गीत हुई सबसे पराई', 'इस प्यार को क्या नाम दूं-एक बार फिर', ज्योति, ये रिश्ते हैं प्यार के जैसे हिट टीवी शोज में काम किया। वहीं, वे इत्तेफाक और हंसी तो फंसी जैसी फिल्मों में भी नजर आए थे। समीर के आकस्मिक मौत से टीवी और फिल्म इंडस्ट्री सकते में है। उनके यूं दुनिया छोड़कर जाने पर ऐक्टर वरुण धवन, सिद्धार्थ मल्होत्रा सहित मुग्धा गोडसे, दीपानिता शर्मा, मौनी रॉय, गौरव चोपड़ा, गौतम रोडे आदि कलाकारों ने शोक जताया। कविताओं में बांटा था दर्द समीर ने भले ही कोई स्यूसाइड नोट न छोड़ा हो, लेकिन उनके इंस्टाग्राम पोस्ट देखकर उनका दर्द साफ समझा जा सकता है। उनकी आखिरी कविता 'मेरी राख का सपना' इस बात की ओर साफ इशारा करता है। पिछले साल लिखी इस कविता को समीर ने 27 जुलाई को दोबारा शेयर किया है। ऐक्ट्रेस रिचा चड्ढा ने भी इस पोस्ट पर लिखा कि यह कविता एक इशारा थी, लेकिन कोई समझ न सका। इसके अलावा, समीर की 'ऐसी भावनाओं की आंधी थी, ऐसा दर्द का प्रहार था, अब सिर्फ दर्द भरा सन्नाटा है, ऐसा भावनाओं का प्रकोप था...', 'मैं तो कहता ही रहता हूं, मैं हमेशा डूबा रहता हूं, जब गम होता है तो गम में, वरना गम न होने के गम में...', 'मर मर के जीना आ गया, अब जी और मर के बता...' जैसी कई कविताएं भी उनके दुख, नाखुशी और अकेलेपन की ओर इशारा करती हैं। यही नहीं, ऐक्टर सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या के बाद समीर ने डिप्रेशन और सुसाइड पर भी पोस्ट लिखकर साफ शब्‍दों में कहा था कि डिप्रेशन का दर्द वही समझा सकता है जो उसे झेल रहा होता है।


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