मुंबई अगर आपको लगता है कि कोरोना का ज्यादातर असर पहले से बीमार लोगों पर पड़ता है, तो शायद आप गलत हैं। आंकड़ों के अनुसार, इस बीमारी से राज्य में जान गंवाने वालों में 30 प्रतिशत ऐसे मरीज थे, जिन्हें पहले से कोई बीमारी नहीं थी, फिर भी कोरोना के कारण उनकी मौत हो गई। इसलिए विशेषज्ञों ने लोगों को आगाह किया है कि बीमारी को एकदम भी लाइटली लेने की कोशिश न करें और लक्षण दिखने पर या किसी पुष्ट मामले के संपर्क में आने के बाद जांच जरूर करा लें। कोरोना से हुई मौतों का एनालीसिस करने के लिए राज्य स्तर पर एक कमिटी बनाई गई है। अब तक 4144 मृतकों का एनालीसिस किया जा चुका है। रिपोर्ट के अनुसार 4144 में 30 प्रतिशत (1247) ऐसे लोग थे, जिन्हें कोरोना के अलावा और कोई बीमारी नहीं थी, बावजूद इसके उनकी कोरोना से मौत हो गई, जबकि 2898 (70 प्रतिशत) लोगों में शुगर, हाइपरटेंशन जैसी दूसरी कई बीमारियां देखने को मिली हैं। कुछ मरने वाले ऐसे भी थेकोरोना डेथ कमिटी के सदस्य डॉ अविनाश सुपे ने बताया कि ऐसा बिल्कुल भी नहीं है कि कोरोना केवल उम्रदराज या पहले से बीमार लोगों को मारता है। इसका शिकार कोई भी हो सकता है। हमने जांच में पाया है कि जिन्हें एडमिशन के वक्त कोई बीमारी नहीं थी, लेकिन कोरोना होने के बाद उनकी मौत हो गई, उनमें कुछ लोगों में डायबिटीज और अन्य बीमारी देखने को मिली हैं, लेकिन इसके बारे में मरीज को जानकारी ही नहीं थी। कहने का मतलब कि कुछ ऐसे लोग भी हैं, जिनकी मौत हुई है, जिनमें पहले से बीमारी तो थी, लेकिन उन्हें इसकी जानकारी ही नहीं थी। इसके अलावा कई बार देरी से अस्पताल पहुंचना, इलाज मिलने में हुई देरी के कारण भी मौतें हो जाती हैं। जान गंवाने वाले ज्यादातर 50 से ऊपरअगर मुंबई की बात करें तो शुक्रवार तक महानगर में कोरोना से मरने वालों की संख्या 5,981 थी, हालांकि इनमें से 4879 लोग 50 साल या उससे अधिक उम्र के थे। औसतन 81 प्रतिशत लोग 50 साल से अधिक उम्र के थे। जानकारों के अनुसार बढ़ती उम्र के साथ कोरोना का अधिक असर दिखता है, लेकिन कोरोना का असर बस उन पर ही हो ऐसा बिल्कुल नहीं है। मुंबई का अब तक का हालनए केस: 1090 नई मौत: 52 कुल केस: 107981 कुल मौत: 6033 ऐक्टिव केस: 23071
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