उन्हें 1962 का नोबेल पुरस्कार मिला था और उन्होंने हर तरह से एक समृद्ध और कामयाब जीवन जिया। लेकिन शुरुआती बरसों में एक समय ऐसा भी था, जब उनके पास खाने के लिए एक दाना तक नहीं होता था और उन्हें दुकान से खाना चुराना पड़ा था।from Navbharat Times http://bit.ly/2DsAEEV
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