1857 से लेकर अब तक, यानी 170 सालों में दिल्ली में बहुत कुछ पाया और बहुत कुछ खो दिया है। 1840 में कुतुबमीनार की बालकनी से नीचे आने के लिए आर्कियॉलजिस्ट एक टोकरी में बैठते थे जो रस्सियों पर टिकी होती थी।from Navbharat Times https://ift.tt/2LuJpQt
1857 से लेकर अब तक, यानी 170 सालों में दिल्ली में बहुत कुछ पाया और बहुत कुछ खो दिया है। 1840 में कुतुबमीनार की बालकनी से नीचे आने के लिए आर्कियॉलजिस्ट एक टोकरी में बैठते थे जो रस्सियों पर टिकी होती थी।
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